फूलियाकलां में बदहाल व्यवस्था: अवैध खनन से कांप रही धरती, स्वास्थ्य-पेयजल को लेकर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा
खनन की मार, घरों में पड़ रही दरारें
ग्रामीणों ने शिकायत की कि क्षेत्र में चल रहे अवैध खनन और ब्लास्टिंग ने जनजीवन को संकट में डाल दिया है। लगातार होने वाले विस्फोटों से न केवल घरों की नींव हिल रही है, बल्कि दीवारों में बड़ी दरारें भी पड़ गई हैं। वहीं, दिन-रात दौड़ते डंपरों और क्रेशरों से उड़ती धूल ने बुजुर्गों और बच्चों के स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डाला है। ध्वनि प्रदूषण और धूल के गुबार ने लोगों का घर से बाहर निकलना दुश्वार कर दिया है।
बूंद-बूंद पानी के लिए मोहताज ग्रामीण
जल संकट का मुद्दा उठाते हुए ग्रामीणों ने बताया कि गांव के विभिन्न मोहल्लों में जलापूर्ति व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। पुराने हैंडपंप और ट्यूबवेल सूख चुके हैं, जिससे पानी के लिए महिलाओं को मीलों दूर भटकना पड़ रहा है। ग्रामीण लंबे समय से नई पाइपलाइन बिछाने और नए ट्यूबवेल लगवाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।
स्वास्थ्य केंद्र बना 'रेफर सेंटर'
राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की दुर्दशा पर चिंता जताते हुए ग्रामीणों ने बताया कि अस्पताल में चिकित्सकों की भारी कमी है। उपखंड स्तरीय अस्पताल होने के बावजूद मरीजों को बुनियादी उपचार के लिए भी बड़े शहरों की ओर रेफर किया जा रहा है। इससे गरीब परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है और समय पर उपचार न मिलने से गंभीर मरीजों की जान जोखिम में पड़ रही है।
सुध नहीं ली तो होगा आंदोलन
ज्ञापन सौंपने वालों में शिवराज आचार्य, दिनेश कुमार, शंकर माली, शंकर सिंह, दशरथ, द्वारका, अंशुल, रतन लाल और सूरज सहित कई ग्रामीण शामिल थे। ग्रामीणों ने प्रशासनिक अधिकारियों को दो टूक शब्दों में चेताया है कि अब आश्वासन का समय निकल चुका है। यदि अवैध खनन पर रोक नहीं लगी और चिकित्सा-पेयजल व्यवस्था में तत्काल सुधार नहीं हुआ, तो ग्रामीण धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।
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